सोमवार, 27 अक्तूबर 2014

तुझे मेरे आँसुओं की कसम ।

चित्र स्रोत - गूगल
तुझे   मेरे  आँसुओं  की   कसम ।
मुझे  माफ़  कर  दो  ओ  सनम ।।
कभी दिल न दुखाऊँगा वादा मेरा ।
मुझे   तेरे   गेसुओं   की   कसम ।।
जल्दी आता समझ नहीं नादान हूँ ।
मैं कैसा भी हूँ लेकिन दिल है नरम ।।
मैं कितना हूँ  ढीठ तुम सोचो भले ।
तुमने  ही   बनाया  मुझे  बेशरम ।।
अलग तुमसे रहूँ न ऐसी देना सजा ।
तुम्हारे बिना नहीं रह सकते हम ।।
तुमने  ही  कहा  था ज़रा याद करो ।
छोड़कर के तुम्हें नहीं जायेंगे हम ।।

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ... क्या बात है इन मस्त मस्त शेरों की ... मज़ा आया ...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (28-10-2014) को "माँ का आँचल प्यार भरा" (चर्चा मंच-1780) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    छठ पूजा की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. दिगम्बर जी और रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी आपको मेरा सादर नमस्कार। बहुत बहुत धन्यवाद ब्लॉग विजिट और कमेंट करने के लिए।

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